मन की पीड़ा
मन के भीतर
मूक सी है
कैसी जीवन में
जीवन की
भूख सी है
कोमल मन में
भाव समाहित
हृदय में खिली
कोई धूप सी है
रिश्तों में विफलता
संबंधों की चूक सी है।
-फ़ौज़िया नसीम शाद
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