मां तेरे त्याग को शब्द दे सकूं,नहीं है मुझमें क्षमता।
अतुलनीय है तेरा समर्पण,बड़ी निश्चल तेरी ममता।।
जीवन के जो पल बीते,तेरी ममता की छांव तले।
था लाड प्यार भरपूर वहां,संग में सारे संस्कार पले।
मेरी ख्वाहिश पूरी करने को,दिन रात तेरा वो लगना
जीवन की हर शिक्षा देकर,कहना तुम आगे बढ़ना।
जरा सी तारीफों पर भी,था नजर का टीका लगता
अतुलनीय है तेरा समर्पण बड़ी निश्चल तेरी ममता।
कष्ट हजारों सहकर भी,तेरा मुस्कान सजाए रखना।
मेरी खुशियों की खातिर,तेरा खुद को भुलाए रखना।
वो दर्द तुम्हारा सहकर भी,आंखों को नम ना करना।
माथे की हर सिलवट को,आंचल से छुपा कर रखना।
पर मुस्काते चेहरे की कहानी,माथे का स्वेद था कहता।
अतुलनीय है तेरा समर्पण,बड़ी निश्चल तेरी ममता।।
संघर्ष भरी हर राहों पे तुम्हारा,संग पिता के चलना।
जैसी भी हो परिस्थिति,खामोशी से तुम्हारा ढलना।
जीवन के मुश्किल प्रश्नों को,यूं चुटकी में हल करना।
कट जाएंगे हर मुश्किल पल, हंस कर तेरा वो कहना।
जीवन की हर उधेड़बुन में मां,मन तुझे याद है करता।
अतुलनीय है तेरा समर्पण,बड़ी निश्चल तेरी ममता।।
-डॉली सिंह
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