ताजमहल तो पत्थर है, सदियों से एक ही जगह खड़ा है,
पर मेरी जान तुम तो चलती फिरती एक ग़ज़ल है,
लेकिन मेरे अल्फाजों में तेरी आंखों का नूर उतर गया है,
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