मौत से बढ़कर भी एक सज़ा है, बीते पलों को याद करना,
दिन में अकेले में तड़पना और रात में रात में घूंट घूंट कर रोना,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X