हां नहीं भरता मेरा मन तुम से, तुम्हारी पहली मुहब्बत से,
तुम जितनी भी करती हैं मुहब्बत, दिल और मांगता है तुम से मुहब्बत,
तुम मुझे हर बार चाहिए पिछली बार से भी ज्यादा,
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X