सिंदूर का स्वरूप बदल कर, बारूद में ढाला हमने,
माँ की लाज का मान बचाया, लोहा फिर से मारा हमने।
चिंगारी बनकर फूटी वो, दुश्मन के हर ठिकाने में,
आज तिरंगा लहरा रहा है, पाक की वीराने में।
रोक के पानी आग लगा दी, पापी पाकिस्तान में,
सीना ताने खड़ा है भारत, हर इक बलिदान में।
ऑपरेशन "सिंदूर" का ज्वाला, मिट्टी से उठकर आया,
हर एक वीर की साँसों ने, रण में आग को भड़काया।
तोपें गरजी, बंदूकें बोलीं, दुश्मन की हर चाल हारी,
जयघोष से गूंजा आकाश, भारत माँ ने आँखें नम कर डारी।
रोक के पानी आग लगा दी, पापी पाकिस्तान में,
हर कण-कण गूँज उठा है, "जय हिंद" के एलान में।
वीर जवानों की हुंकार से, सीमा ने अंगड़ाई ली,
खौफ से काँप उठा दुश्मन, उसकी साँस थरथराई सी।
माँ के आँचल का ये सिंदूर, अब रण का श्रृंगार बने,
भारत की माटी का हर कण, जय की पताका तले तने।
रोक के पानी आग लगा दी, पापी पाकिस्तान में,
अब की बार इतिहास लिखा, भारत के सम्मान में।
वह सिंदूर जो माथे पर, प्रेम का प्रतीक बना था,
आज वही अंगार बनकर, रण का भी संगीत बना था।
माँ की गोद में खेला जिसने, वो शेर बनकर निकला है,
हर एक गूँज में है भारत, दुश्मन का स्वर अब पिघला है।
रोक के पानी आग लगा दी, पापी पाकिस्तान में,
अब न कोई ख्वाब बचेगा, उसकी झूठी उड़ान में।
वीरों की शपथ है ऐसी, अब कोई कदम न डगमगाएगा,
देश के दुश्मन को भारत, हर बार सबक सिखाएगा।
मिट्टी की खुशबू में अब, वीरों का लहू मिला है,
स्वाभिमान का सूरज देखो, हर कोने में फिर खिला है।
रोक के पानी आग लगा दी, पापी पाकिस्तान में,
अब की बार लिखा गया है, विजय का इतिहास इंसान में।
-सीमा गुप्ता
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