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सीख लिया

                
                                                         
                            गिर गिर कर पैरों पर ही तो
                                                                 
                            
अब मैंने चलना सीख लिया
मुश्किलों भरी राहों पर अब
मैंने गिरकर संभलना सीख लिया ।


तिनका तिनका चुन चुन कर अब
मैंने मोती चुनना सीख लिया
कांटों से उलझ उलझ कर अब
मैंने फूलों को पाना सीख लिया।

सफलताओं-असफलताओं के साथ
अब मैंने जीवन जीना सीख लिया
दुनिया के इस रंग-मंच पर अब
मैंने अभिनय करना सीख लिया।

सच और झूठ के बीच में अब
मैंने अन्तर करना सीख लिया
गिरगिट से बदलते चेहरों का अब
मैंने रंग पढ़ना सीख लिया।

सागर की लहरों से लड़ लड़ कर
साहिल पर पहुंचना सीख लिया
जल जलकर आग में मैंने अब
कुंदन सा चमकना सीख लिया।

दरिया के संग चलते-चलते अब
मैंनें राहों को गढ़ना सीख लिया
मंजिल में खड़ी बाधाओं से
अब मैंने लड़ना सीख लिया।

दिनेश यादव
सहायक प्रोफेसर
गुरु नानक देव प्रौद्योगिकी संस्थान रोहिणी दिल्ली


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7 वर्ष पहले

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