संवेदनाएँ मर गई हैं,
मगर एहसास अभी बाकी है।
कराहना भी भूल गए हैं,
मगर दर्द अभी बाकी है।
चेहरों पर हँसी तो है,
मगर आँखों में नमी बाकी है।
रिश्ते तमाम टूट गए,
मगर एक आस अभी बाकी है।
शोर बहुत है दुनिया में,
मगर भीतर ख़ामोशी बाकी है।
हम ख़ुद से भी दूर हो गए,
मगर ख़ुद की तलाश अभी बाकी है।
सब कुछ ख़त्म-सा लगता है,
फिर भी कुछ तो बाकी है—
शायद साँसों में ज़िंदगी नहीं,
मगर ज़िंदगी का एहसास अभी बाकी है।
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