मानवता के हित साधक संघर्षो के चलवाने हो तुम।
हो कर्म योग तुम गीता के वसुधा के शौर्य जयगान हो तुम।।
हे सर्वजयी सदगुण सुजान
तुम स्वाभिमान के लायक हो,
हो आजादी के मतवाले
युग द्रष्टा विश्व विधायक हो।
गौरव ललाम शिव वंश अंश,
उन भारशिव के शान हो तुम।
हो राजभर के कुलभूषण
सद् कीर्ति के सबल विहान हो तुम।।
हे विश्व जयी हे क्रांति वीर
तुम जनगण के अधिनायक हो
हो संघर्षों के सहचर तुम।
तुम विश्व कीर्ति के नायक हो।।
संकल्प शक्ति के साधक हो
वलिदान के प्रवल विधान हो तुम
हो राष्ट धर्म के संरक्षक
वसुधा के शौर्य जयगान हो तुम
हो कर्म योग तुम गीता के वसुधा के शौर्य जयगान हो तुम।।
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