एक दीपक त्याग और बलिदान की सच्ची कथा है
गांव की मिट्टी और कुंभकार के हाथों की व्यथा है.
उसे बाती तेल का पूरा समर्पण रातभर का चाहिए
सुबह की पहली किरन तक साथ देगा प्रण किया है.
-दिनेश चौहान
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