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इमारतें कंक्रीट की हैं बहुत आदमी क्यों भूखा रहता है.

                
                                                         
                            भूख का कोई धर्म नहीं होता
                                                                 
                            
फिर धर्म क्यों भूखा रहता है.

रोटियां हरेक को ही चाहिए
ये मर्म क्यों सूखा रहता है .

इबारतें पेट भर पायेंगी क्या
विधान बस धोखा रहता है .

इमारतें कंक्रीट की हैं बहुत
आदमी क्यों भूखा रहता है.

लोकतंत्र जिन्दा रावण है
राम का तो झोंका रहता है.

चढ़े जो सलीब पर दिखते
कागज का खोखा रहता है.
-दिनेश चौहान
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21 घंटे पहले

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