बूँद बारिश की जब चेहरे पर उसके गिरी
रुक गई फिर चली वो गाल पर ठहरी रही
पर गवाही प्यार की देती नहीं वो अब कहीं
कत्ल आंखों ने किया तो बूँद भी प्रहरी रही.
-दिनेश चौहान
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