घर की उलझनों से इतना परेशान हो गया
रात को लुढ़क कर वह खुद जाम हो गया.
जेब खाली हुई लौटते वक़्त दोस्त ना मिला
देर रात लौटा बिन पिये ही बदनाम हो गया.
कई रोज से दौड़ता रहा जिस काम के लिए
पियक्कड़ पुराना मिला पल में काम हो गया.
शराब बहुत बुरी होती है बात सब कहते रहे
हलक के नीचे क्या उतरी ग़म तमाम हो गया.
दुनिया में अच्छा कौन और बुरा कौन है यहां
पी कर लिखने वालों का बहुत नाम हो गया.
-दिनेश चौहान
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