आपको देखा नही कभी सर झुका कर बैठे हुए,
आपको देखा नही कभी आराम करते हुए,
आपको देखा नही कभी खामोश रहते हुए,
आपको देखा नहीं कभी होठों से कुछ बोलते हुए,
मेरा आपका रिश्ता नही कोई ऐसा वैसा,
आप ही से तो है वजूद है मेरा,
जब तक साँसें चलेंगी,
आप ज़िंदा रहोगे मेरी हर साँस में,
जानती हूँ आप साथ छोड़ चुके हो मेरा,
भला एक पिता पुत्री का रिश्ता कभी टूट सकता है,
कभी नही कभी नही,
यह रिश्ता यूँ ही बना रहेगा,
हर दिन आपके ही पदचिन्हों पर चलूँगी,
आपके दिए संस्कारों का मान करूँगी,
आपको देखा नही कभी मायूस होते हुए।
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