किस्सा है यूं बचपन का
तुमका जउन सुनाईत है
का दिन उइ लरिकाई के
अब सोच सोच पछिताईत है
गरमी बीतत बगियान मा
दिन भर तूरत आम रही
भूख लगै तौ सेतुआ खाई
बेरवा तन आराम करी
रहे तल्लउवा एक हुवै पर
दुपहरीया वही मा कूद परी
पंखा कै कोई झंझट नै
पानीन मा सुख पाईत है
किस्सा है यूं बचपन का
तुमका जउन सुनाईत है
बप्पा बाबा करै किसानी
खडी दुपरिया जेठ मास कै
उई खेतेम ब्यार कराये रहे
चलै पसीना देहीस उनकी
तबहू न घबराये रहे
ठीक दुपरिया दादी आवै
बप्पा कै उई नाम घोरावै
बइठी बेरवा के नीचे अपना
हमहु क हुकूम सुनावत है
किस्सा है यूं बचपन का
तुमका जउन सुनाईत है
बीत गये सब दिन उई भइया
अब तो नवा जमाना है
दादी बाबा क बात करै को
अपनै नहीं ठेकाना है
सपने बचपन देखित है
कब्बौ जब बइठ उघाईत है
किस्सा है यूं बचपन का
तुमका जउन सुनाईत है
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