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प्रभु जी लाज रखना है आपके शरण।।

                
                                                         
                            शिक्षक पुत्री शिक्षक दिवस को अवतरण,
                                                                 
                            
भाषा भाष्य की लगती अलंकरण।
मधुभाषिता,समझभरी बेटी मेरी,
बिखेर खुशबु जिसका हुआ नामकरण।।
मेधावी बचपन से दिखलाई झलक,
नित रोज हुई बचपन का संस्करण।।
जैसा नाम वैसी दिखती भी है,
नहीं होने देगी अपनी प्रतिभा का क्षरण।।
मानवता का पाठ पढ़ाने वाली,
स्वतः आवाज उठती उसके अंतःकरण।।
बड़ी खुश होती सुन शिक्षक दिवस उद्गम,
कहती करुँगी सफलों का अनुकरण।।
सच की सखी,सच में लकी,
प्रभु जी लाज रखना है आपके शरण।।
जन्मदिन की बधाई बेटी तुझे,
मनोबल से मजबूत हों तुम्हारे चरण।।
तुम धुरंधर पिता की संतान हो,
याद रहे तुम्हें ये मेरा आजीवन स्मरण।।
-धीरेन्द्र सिंह "धुरंधर"
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3 घंटे पहले

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