आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नफ़रतों का बोझ दिल में रखता नहीं

                
                                                         
                            मैं मोहब्बत न दोस्ती रखता हूँ,
                                                                 
                            
बात मगर अनजान से भी करता हूँ।l

लोग कहते हैं, गलत है ये बंदा,
मैं उनसे भी हर बात पर बात करता हूँ।l

नफ़रतों का बोझ दिल में रखता नहीं,
हर किसी से मुस्कुराकर मिला करता हूँ।l

कौन अपना है, कौन गैर है यहाँ ''देव,
मैं तो बस इंसान पर ऐतबार करता हूँ।l
- देवराज मिश्रा.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर