मेरे जीवन का चिराग आंधियों में जला,
की रोशनी चारों ओर अंधेरे को चीरा।
परवानों सा पागल, शमा से लड़ा,
न कुछ कहा, ना ही सुना, पाया उसे जिसे लक्ष्य था चुना।
जीत विरोधियों के दिलों को, मौजी चला।
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