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मेरे अल्फाज़

क्यों खुदा तू मिलता नहीं

Dev Yadav

7 कविताएं

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तू लफ्ज है अल्फाज है तू गूँजता है हर कहीं।
तू आब है तू आग है गिरता कहीं उठता कहीं।।
तू आम है या राज है खोता नहीं पाता नहीं।
जानता हूँ है यहीं तो क्यों खुदा मिलता नहीं।
तू दिल में है या दिल ही है,कैसे कहूँ जानू नहीं।
लाखों खुदा हैं नाम के तेरे सिवा मानु नहीं।।
साहिल बने तूफान भी कैसे करे जानू नहीं।
इधर भी तू उधर भी है मैं किस तरफ जानू नहीं।
पर्दा करूं परखा करूँ तुझे किस तरह जानू नहीं।
ऐसा ना हो मिल जाये तू मैं पारखी मानू नहीं।
एक रौशनी दिखला भी दे,कुछ जुग्नुएं चमका भी दे,
है रात,रात काली सी कुछ जलवे तू दिखला ही दे।
मैं थक चुका हारा नहीं दुश्मन से तू मिलवा भी दे,
हो तीर मेरे सीने में तू सामने दिखलाई दे।
मरकर मिले जो तू खुदा मरना मुझे सिखला भी दे।
या मार दे खुद ही मुझे जलवा अता फ़रमा ही दे।
By Dev


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