दो नैन दो अश्क और चार पल,
यही प्यार है यही दोस्ती भी।
नाम तो बहुत है,
नाम तो बहुत है, बाजार में इश्क़ का,
पर कम नहीं कीमत भी दोस्ती की।।
माना,
माना इश्क़ दरिया है एक आग का,
पर कुआँ है मौत का दोस्ती भी।
अरे डूबते हो!
डूबते हो,तो डूब जाओ तुम प्यार में,
पर डूबते को बचाती है दोस्ती ही।।
By dev
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