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ज़िन्दगी में तो ताने-बाने बहुत हैं,

                
                                                         
                            ज़िन्दगी में तो ताने-बाने बहुत हैं,
                                                                 
                            
कि चार सू सियाह-ख़ाने बहुत हैं।

साथ रहकर भी दिल नहीं मिलते,
ऐसे दुनिया में आशियाने बहुत हैं।

चढ़ावा थोड़ा सा कर देना लूट का,
पाप धुल जाएंगे बुत-ख़ाने बहुत हैं।

ज़रूरत ही नहीं है कुछ समझाने की,
अहल-ए-दुनिया सब सयाने बहुत हैं।

मुस्कुरा कर तो कई लोग मिलते हैं,
हक़ीक़त में वो सब बेगाने बहुत हैं।

ग़बन कर लेते हैं दान तक भी "शमीम",
हमने सुने हैं ऐसे फ़साने बहुत हैं।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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एक घंटा पहले

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