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तुम्हारे इन आँसुओं के

                
                                                         
                            तुम्हारे इन आँसुओं के
                                                                 
                            

सुनो,

मेरी बगिया महकती है तो सिर्फ तुम्हारी वजह से,
मेरी कलियाँ हँसती हैं तो सिर्फ तुम्हारी वजह से।

तुमने अपनी धूप दे दी,
अपनी मुस्कान दे दी,
और किसी को पता भी नहीं चलने दिया
कि तुम अंदर से कितने टूट रहे हो।

मैंने कहा था बगिया महकती रहे,
पर ये नहीं कहा था कि तुम खुद मुरझा जाओ।

हर बार कलियों के आँसू पोंछते हो,
कभी अपने भी तो पोंछ लो।

तुम कहते हो रोना मत,
पर मैं कहती हूँ - रो लो।
जो आँसू तस्वीर देखकर निकलते हैं,
वो कमजोरी नहीं, तुम्हारी सच्ची मोहब्बत हैं।

तुम तस्वीर में मेरा चेहरा ढूंढते हो,
मैं हर कली में तुम्हारी थकान देखती हूँ।

तो आज मेरी बारी...

बस एक बार,
मेरी बगिया को छोड़कर,
अपने दिल की तरफ भी देख लो।
उसे भी थोड़ी धूप दे दो।

मेरी दुआ है -
मेरी बगिया नहीं,
तुम हमेशा महकते रहो।
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2 घंटे पहले

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