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सुकून, एक नई शुरुवात

                
                                                         
                            ज़िंदगी ने बहुत कुछ सिखाया है…
                                                                 
                            

कुछ लोगों ने प्यार दिया,
कुछ ने धोखा दिया,
कुछ ने साथ छोड़ दिया,
और कुछ ने बिना कुछ कहे बहुत कुछ समझा दिया।

पहले मैं सोचता था—
आख़िर मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ?

फिर एक दिन समझ आया…

ज़िंदगी हमेशा हमें वह नहीं देती,
जो हम चाहते हैं;
कभी-कभी वह हमें वह सिखाती है,
जिसकी हमें सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है।

अब किसी से शिकायत नहीं,
किसी से बदला नहीं,
बस अपने अनुभवों को शब्द देना है…

ताकि मेरी कहानी पढ़कर
किसी टूटे हुए इंसान को हिम्मत मिले,
किसी अकेले इंसान को अपना होने का एहसास हो,
और किसी भटके हुए इंसान को
अपनी राह मिल जाए।

क्योंकि सुकून बाहर नहीं मिलता…
सुकून तब मिलता है,
जब इंसान अपने भीतर से लड़ना बंद कर देता है। 
-देव कुमार पटेल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
23 घंटे पहले

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