आज फिर गोकुल में खुशियों की बहार आई,
मुरली की धुन ने प्रेम की तान सुनाई।
नंद के आँगन में उतरा है नन्हा कन्हैया,
माँ यशोदा के आँचल में मुस्काया कन्हैया।
माथे पर मोरपंख, अधरों पर मुस्कान,
हाथों में मुरली, आँखों में सारा जहान।
राधा के प्रेम में जिसकी दुनिया सँवर जाए,
रुक्मणी के संग जिसका हर रिश्ता निखर जाए।
जहाँ प्रेम हो, वहाँ कान्हा का वास हो,
हर दिल में उनके नाम का एहसास हो।
मिट जाएँ मन के सारे अँधेरे आज,
कृष्ण की कृपा से खिल उठे जीवन का राज।
आओ मिलकर प्रेम का दीप जलाएँ,
जन्माष्टमी पर कान्हा को दिल से बुलाएँ।
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