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हम दोनों में ही सिमटेंगे।।

                
                                                         
                            चांद भी
                                                                 
                            

डूबी रात क्षितिज के पार,
चाँद भी अब शरमाने लगा।
ले अंगड़ाई जो तू आई,
मेरा मन भी बहकने लगा।।

पलकें बिछी हैं, साँसें रुकी हैं,
साजन को सजनी ने पुकारा।
छलका नहीं, ठहरा है यौवन,
तेरे आने की आहट से सँवारा।।

जब नज़रों से नज़र मिलेगी,
धड़कन से धड़कन टकरायेगी।
खुलेगी नहीं, महकेगी कलियाँ,
खुशबू से रात नहायेगी।।

आएगा जब तूफान वो,
दामिनी नहीं, हम दमकेंगे।
उठेगी लहर तो सागर में नहीं,
हम दोनों में ही सिमटेंगे।।
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2 घंटे पहले

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