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वजूद और अहंकार

                
                                                         
                            किसी ने नारी के वजूद की परवाह न की,
                                                                 
                            
लोगों को हर घड़ी अपना वजूद खतरे में लगा,
नारी को सिर्फ एक पहचान की ही भूख थी,
फ़िक्र अहंकार को फिर अपने वजूद की थी,
वजूद की खातिर ही अहंकार सिर उठाते हैं,
वजूद की खातिर ही रिश्ते न पनप पाते हैं,
वजूद की खातिर ही है बेटे का अभिमान बड़ा,
वजूद न मिलने से ही बेटियां मुरझाती हैं।।
-दीप्ति त्रिपाठी
 
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एक घंटा पहले

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