तेरी मोहब्बत में यूं गिरफ्तार हुए,
जान बूझ कर खुद को उम्रकैद दे दी।
मैंने तेरे प्रेम की पायल पहनीं,
तुमने मेरे पांवों में बेड़ी दे दी।
हम जिसे अपना आशियाना समझे,
उसने ही मेरी उड़ानें ले लीं।
रिहाई की अब कोई ख्वाहिश न रही,
हमने तो खुद ही ज़ंजीरें चूम लीं।।
-दीप्ति त्रिपाठी
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