कहीं दूर प्रकृति के गाँव में,
पर्यावरण की छांव में,
कुछ पल बिताते हैं,
मन के भंवरे मुस्कुराते हैं।
फूल की पंखुड़ियों जैसे,
तितलियों के पंख हैं,
हिलती - डुलाती टहनियों से
हवा में सुगन्ध है।
पर्यावरण परिपूर्ण शुद्धता के संग है,
आओ चलें दूर कहीं....
प्रकृति के गांव में,
पर्यावरण की छांव में।।
-दीप्ति त्रिपाठी
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