सच और झूठ में
उलझ जाते हैं हम लोग
फरेब न पहचान कर
टूट जाते हैं हम लोग,
उम्र भर की
शिकस्त मंजूर करते हैं
चार दिन का साथ
निभाने के लिए हम लोग।।
-दीप्ति त्रिपाठी
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