बलम कहां रैन बिताए
भोर ही घर आए ...
बैठ निहारु बाट तिहारी,
मन जोगन, जोगन हो जाए।
दीपक बुझ गया बाट जोहते,
नैन थके,पर आस न टूटे...
बलम कहां रैन बिताए,
भोर ही घर आए।।
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