आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पुलवामा हमला..

                
                                                         
                            १४ फरवरी
                                                                 
                            
"न भूलने वाला
न क़ाबिले माफ़ी"
एक काला दिन|

पुलवामा हमला..
ओछी साजिश..
गन्दी रंजिश…

नम नयनों से..
अर्पित करते…
विन्रम श्रद्धांजलि!

आप थे..
आप हैं..
आप रहेगें..
कभी आदर्श बन कर..
कभी मिशाल बन कर..

आप थे,
आप हैं,
आप रहेगें..
कभी अभिमान बन कर..
कभी जय-जयकार बन कर…

आप थे,
आप हैं,
और जबतक हैं..
हम हैं,
हमारी आज़ादी है,
हमारी ज़िंदगानी है,
हमारी हर कहानी है..
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर