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हिन्दी के होते

                
                                                         
                            ग़र होते हिंद के, तो हिंद की बात करते
                                                                 
                            
धर्म को धर्म, ना की हथियार धार करते
हर एक पंडित को नहीं, आतंकी साफ़ करते
ग़र होते हिंद के ।

सबको सुधारने के पहले, खुद पाक साफ़ होते
हर एक चिंगारी को ना वो ब्रमोश समझते
माब लिंचिंग को ना जन संघार कहते
ग़र होते हिंद के ।

ना होते वो धर्म के, तो क़ानून अज़ार करते
ना चार बीबियाँ रखते, ना तीन तलाक़ करते
ग़र होते हिंद के ।

अपने अब्बाओ की ग़लतियाँ पर खुद जार ज़ार होते
हर नयी मस्जिद के पहले, १०० मंदिर आज़ाद करते,
ग़र होते हिंद के ।

दो बच्चे करते, नाकि २० पैदा करते
जनसंख्या के खेल ना खेल कर
बेटे को पड़ाते, बेटी को सिखाते
ना बुर्के की आड़ में, जाहिल बना के रखते
ग़र होते हिंद के ।

जिस योग से दुनिया सीख रही, उसको इंतिखाब करते
वेद पाठ करते, फ़तवा ना बायाँ करते
ग़र होते हिंद के, तो हिंद की बात करते ।

गिरेबां में अपने झाँकते, सारे सुराग देखते
किसी कहने से पहले, ग़लतियाँ क़ुबूल करते
क़ुरान के साथ साथ, गीता भी साथ रखते
ब्रह्मा विष्णु महेश, के साथ पैग़म्बर भी देखा करते
सही बात कहते. सही बात करते
ग़र होते हिंद के ।
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2 वर्ष पहले

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