एक कदम स्वच्छता की ओर
लिए लक्ष्य चल पड़े जीवन की ओर
घर,गली, मोहल्ला स्वच्छ करने की ठानी है
देश की आन बान शान सुंदरता बढ़ानी है
नन्हे दिल से वृद्ध की लाठी
पढ़नी है स्वच्छता की पाठी
स्वाभिमान स्वच्छता से
अभिमान स्वच्छता से
करने सपने पूरे हैं
बस एक कदम स्वच्छता की ओर
शर्म कैसी कचरा उचित स्थान पर डालने की
जाती कैसी कचरा उठाने की
घर गली अब नही रहा पराया
कचरा डालने का नही लगता किराया
अब नही दूर स्वच्छता की ओर
बस एक कदम स्वच्छता की और
दक्षल कुमार व्यास
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X