टूटी चप्पल को सहारा दे चल
पहुंचा वो दफ्तर बाबू के सामने
अपने अधिकार की भीख मांगने
पेंशन के कागज आगे सरकाने
चुटकी भर आश्वासन, दरिया भर अपमान
आखिरी वक्त बस यही पड़े मिले सिरहाने
-चित्रा
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