सोनचंपा के फुलों से भरीं
बोतल देखकर
आंखों में तैरने लगी
वह सारी स्त्रियां
जो दिवारों की बोतलों
में परंपरा के पानी में
डुबोकर
ऐसे ही सजायी जाती है
तारीफें होती है
उनके घुंघट की
ज़मीन से
चिपकी नजरों की
गुंगी ज़ुबान की
आहट न करने वाले कदमों की....
धीरे धीरे
जब बेजान हो जाती है स्त्रियां
तब भी जिंदा दिखाई देती है
परंपरा के पानी में
डुबोकर
ऐसे ही सजायी जाती है स्त्रियां
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