वो उड़ा देश का वीर सपूत
शत्रु से टकराने को
एक सबक याद दिलाने को
अपना सर्वस्व लूटाने को
अभिनंदन है उन जननी को
जो ऐसे शेरो को जनती हैं
जिनके शोर्यों की गाथा से
शत्रु की श्वासें चढ़ती हैं
ललकार सुनी जब शत्रु की
हिन्द शेर दहाड़ा है
तेरे एफ सोलह के आगे
मेने बस मिग उतारा है
काफी है ये शमशेर पुरानी
तेरा दिव्यास्त्र गिराने को
देख उड़ रहा काल तेरा
तुझे ग्रास कर जाने को
लक्ष्य भेद जब उड़ा वीर
चक्रव्यूह में खुद को पाया है
गीदड़ झुंड प्रहारों से
खुद को बचा न पाया है
शत्रु से घिर जाने पर
वीर नही धीरज खोता
हाथ बांध देने से
स्वाभिमान कभी न कम होता
माँ भारती के उदघोषों का
आज सरहद पार जयकारा है
देख देशप्रेम उस राष्ट्रभक्त का
शत्रु भी अभिनंदन को हारा है
तेरे सहास और शौर्य के आगे
शत्रु ने सभा बुलाई है
हुरदंग मचाने वालो ने
शांति की गुहार लगाई है
फैली जब खबर स्वदेस में अपने
शत्रु ने दखिन शेर फसाया है
आया देशप्रेम का सैलाब हिन्द में
हर दिल मैं अभिनंदन छाया है
रख न सकता शेर ए हिन्द पिंजरे में
शत्रु को बात समझ जब आयी है
विश्व सहानभूति पाने को उसने
वापिस करने को की अगुवाई है
भर गयी आँखें ,आँशु से खुशी में
हर भारतीय को गर्व कराया है
परचम लहरा कर शत्रु खेमे में
निज वतन , वीर जब आया है
माँ भारती के उदघोषों का
चहुँ ओर लगा जयकारा है
अभिनंदन है,अभिनदंन तेरा
अभिनंदन का जयकारा है
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