जैन धर्म के दस लक्षण देते जीवन को आकार,
उन दस लक्षणों से बना है जीवन का आधार।
दया क्षमा करुणा हों उचित जीवन संस्कार,
सभ्यता संस्कृति का होता पुष्ट हमेशा संसार।।
अस्तेय ब्रह्मचर्य अपरिग्रह दया धर्म आचार,
तेज ओज सत्य निरामिष भोजन का सत्कार।
जैन धर्म पालन करे और जीवन को दे संस्कार,
मित्र वत हितैषी बन प्राकृतिक का है उपचार।।
आत्म शुद्धि नित प्रति होती रहे हो जीवन का सत्कार,
मित्रवत व्यवहार से जीत लें हम समस्त संसार।
भारत की सभ्यता निराली होता जहां शुभ व्यवहार,
दया धर्म में ही बसता है मानवता का सच्चा संसार।।
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