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आतंकवादी और कवि

                
                                                         
                            नाम दोनों के ही कुछ सुने सुने से लगते हैं।
                                                                 
                            
दोनों ही आतंक के औजार साथ रखते हैं।।

कुछ हथियारों के बल पर कोहराम मचाते हैं।
कवि तो कविता के ही परमाणु बम बनाते हैं।।

दहशत तो दोनों की जग में बरकरार रहती है।
कहीं हंसी की फुलझडियां कहीं मानवता रोती है।।

कुछ की जिंदगी मानवता को समर्पित होती है।
कुछ अपने कर्मों से पूरी दुनिया को रूलाते है।।

कहीं कविता में श्रंगार की रोचकता होती है।
कहीं दुनिया में दहशत की अनहोनी घटती है।।

कहीं प्रेम सौहार्द की चौखट पर शीश नवाते हैं।
कहीं रोती कलपती मानवीता के मंजर आते हैं।।

कवि मन की भड़ास कविताओं में सुनाते हैं।
आतंकी आतंक से पूरी दुनिया को डराते हैं।।

मानसिकता बस इतनी बदलती है यहां अक्सर
जीवन के सुर जुदा जुदा यहां नजर आते हैं।।

कवि भावनाओं से पिरोकर शब्दों का हार बनाते हैं।
आतंकी शब्दों में विष घोलकर दुनिया को पिलाते हैं।।

कवि देश भक्ति की आग जलाकर उजियारा करते हैं।
आतंकी दहशत फैलाकर दुनिया में अंधेरा करते हैं।।

वक्त की तराजू पर अक्सर ये दोनों ही तोले जाते हैं।
कहीं प्रेम की बारिश कहीं खतरे के बादल मंडराते हैं।।

कोशिशें दोनों में छुपी होती है अक्सर जो वार करती हैं।
कहीं प्रेम की धारा बहती कहीं दुनिया का नाश करती है।।

मुकद्दर भी दोनों का एक सा होता है यहां अक्सर।
कहीं प्रेम की कहानी तो कहीं दुश्मनी की निशानी।।

ज़ख्म भी दोनों को ही मिलते हैं मगर जुदा पैगाम होते हैं।
कुछ के अंजाम दिल खुश तो कुछ के अंजाम बुरे होते हैं।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय
 
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3 महीने पहले

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