माता का दरबार सजा है भक्तों मांगों अरदास,
भक्तों मांगों अरदास माता आई हैं तुम्हारे पास।
ढोल नगाड़े बजने लगे हैं भजन कीर्तन होने लगे हैं,
कन्या पूजन होता है आज भक्तों मांगों अरदास।।
संस्कारों की बेल बढ़ी है संस्कृति परवान चढ़ी है,
जीवन में खुशियां छाई है भक्ति भरा है आकाश।
लेखनी चली है सृजन करने माता दो तुम आशीर्वाद
काव्य पुष्प से प्रफुल्लित हो सबका शुभ प्रभात।।
न धरा पर कोई दुखी रहे मांग रहे तुमसे अरदास,
प्रफुल्लित जीवन की है हे माता बस तुमसे आस।
माता का दरबार सजा है भक्तों मांगों तुम अरदास,
चूड़ा कंगन ले सिंदूर चढ़ाओ खुशी से तुम आज।।
जयंती मंगला काली माता के है ये रूप निराले,
दुर्गा करती दुर्गुणों का नाश भक्तों मांगों अरदास।
सिंह वाहिनी माता का ले लो झोली भर आशीर्वाद
माता के मंदिर में जाकर भक्तों पूरी कर लो आस।।
माता आई हैं तुम्हारे पास पूरी कर लो अपनी आस,
जो मांगोगे वही मिलेगा कर लो मां से तुम अरदास।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय
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