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कागज की कश्ती को तूफान से गुजरने दो

                
                                                         
                            कागज की कश्ती को अब तूफ़ान से गुजरने दो,
                                                                 
                            

हौसलों की बुलंदी पहचान तुम्हारी बनें,
हर तूफान में तुम्हारी कोई कहानी बनें।
चल पड़े जो कदम रुक ना पाएं कभी,
कागज की कश्ती को तूफान से गुजरने दो।।

थपेड़े मुश्किलों के सहते तुम जाना
मंजिल को अपनी तुम मुकाम बनाना।
हिमाचल सा उठा लेना तुम शीश को
कागज की कश्ती को तूफान से गुजरने दो।।


बढ़ता रहा हूं मैं अपनी मंजिल की ओर,
जीवन का किनारा न कभी बिगड़ने दिया।
आता है तूफान तो उसको अब आने दो
कागज की कश्ती को तूफान से गुजरने दो।।

मत हारना तुम कठिनाइयों के सामने,
भले ही खड़ा हो काल भी तुम्हारे सामने।
अपनी खुशबू को अब थोड़ा महकने दो,
कागज की कश्ती को तूफान से गुजरने दो।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय
 
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3 घंटे पहले

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