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बादल के चेहरे

                
                                                         
                            दिख रहा घना कोहरा सा सूरज भी डरकर छुप गया हो जैसे।
                                                                 
                            
इन बादलों के उस पार शाय़द संदेश खुशहाली का लाया हो जैसे।।
कहीं अनहोनी बनकर बरसे तो कहीं उम्मीदों की आस जगाई।
कहीं बाढ़ मुसीबत की आई तो कहीं चातक की प्यास बुझाई।।
कहीं स्वर सुंदरी दिखी इनमें तो कहीं मुसीबत ने ली अंगड़ाई।
कहीं धरती की प्यास बुझाई तो कहीं जीवन की आस जगाई।।
मनमोहन बादल की परछाई तो कहीं नयी मुश्किल घर आई।
कहीं श्याम सलोनी सूरत देखी तो कहीं नागिन की फुफकार सुनाई।।
कहीं चलते बादल खूबसूरत देखे तो कहीं  सपने उजड़ते देखे।
बादल तो बादल है इनमें हमने अपने जीवन के सपने देखे।।
कहीं उम्मीदों का जलता दीपक है तो कहीं मुसीबत की रेखा है।।
कड़कड़ाती बिजली जैसे किसी मृत्यु का कोई संदेशा है।
बेमौसम आते बादल जैसे किसी भारी मुसीबत का अंदेशा है।।
खिल उठा उपवन जैसे बारिश की कुछ रिमझिम रिमझिम बूंदों से।
बच्चों की पानी में नाव चली रोग मिटे फसलों के इन बारिश की बूंदों से।।
इन बूंदों में अमृत बसता है जीवन का पौधा इनसे खिलता है।
बादल आते हैं उम्मीदें लेकर इनमें जीवन का सुख दिखता है।।
 
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1 hour ago

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