कितनी है शराबी ये तुम्हारी आंखे
खुद अपना है जवाबी ये तुम्हारी आंखे
नशे का है ये खुम र या है कुछ ही और
उफ़्फ़ यह जो है गुलाबी ये तुम्हारी आंखे
खुली हो तो है कयामत है यह बंद होने पे भी
करती है दिल मे खराबी ये तुम्हारी आंखे
हमने इनको देखा है बचपन से जवानी तक
बदली नहीं है जरा भी ये तुम्हारी आंखे
हमने देखा नहीं है कोइ शरारती इन सा
कैसे कह दे है सीधी सादी ये तुम्हारी आंखे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X