इक रात के लिए ही बस अपना ख्वाब दे दो
कुछ तो कहो न चुप रहो अपना जवाब दे दो
कल दिया था जिसमे छुपा कर प्रेमपत्र तुमको
लाओ हमें तुम आज वापस वो ही किताब दे दो
इश्क में सोहनी ने महि को पंजाब था दे डाला
हुइ तकरार तो कहा था लाओ मेरी चिनाब दे दो
जुदाई के गम में हम मैखाने नहीं जायेंगे
कह देंगे जानेजां की आँखों की शराब दे दो
परवाने तुम जलने को शमा क्यों ढूढते हो
कोई इनको उसका चेहरा ए आफताब दे दो
मेरे दिल में अब जख्मों की कोई जगह नहीं है
हुए जख्म कितने ए चारसाज तुम इसका हिसाब दे दो (चिकित्सक)
वो देखो मेरी जानम बेपर्दा हो जा रही है
ठहरो ए हसीनो जरा उसको नकाब दे दो
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