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मैं मय से बच के फंसा हुस्न में तुम हुस्न से बच के डूबे शराब में

                
                                                         
                            क़ासिद के आते आते मैं जवाब तो लिख रखूँ
                                                                 
                            
मुझे खबर है वो क्या सवाल पूछेंगे मेरे खत के जवाब में
अब तुम ही लगाओ अंदाजा मेरे और अपने हुनर का
मैं नब्ज थाम तजुर्बे से रोग बताता हूं और तुम पढ़ पढ़ किताब में
अमीरे शहर का वो कमर दोहराके मिलना हर मजलूम से
मुझे च्यूंटी काटिए जनाब यह हकीकत है या देख रहा हूं मैं ख्वाब में
यह इश्क़ की अलामत नहीं तो भला किस ओर इशारा है
उसे ठंडक मिलती है आफताब से और तपिश दिखती है महताब में
यह अपनी अपनी तकदीर का तमाशा है इसमें क्या कहिए
मैं मय से बच के फंसा हुस्न में तुम हुस्न से बच के डूबे शराब में
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52 मिनट पहले

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