आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

भाई-भाई में प्रेम

                
                                                         
                            भाई-भाई में प्रेम,
                                                                 
                            
सागर से भी गहरा होता है,
एक-दूजे की खैर करना,
जीवन भर पहरा होता है ।..(१)

होता नहीं कभी बैर,
बस आपस का झगड़ा होता है,
बोले अगर कोई गैर,
भाई पहले ही बगल में खड़ा होता है ।…(२)

दुःख आने से भी पहले,
भाई के हृदय में दुःख होता है,
सुख पाने के भी पहले,
भाई-भाई को सुख दे देता है ।…(३)

भाई के संग होने पर,
जीवन में शान होती है,
भाई के अंदर भाई की जान होती है,
एक-दूजे के बिन दुनिया हैरान होती है।…(४)

बचपन हो या यौवन,
प्रेम प्रगाढ़ होता है,
जीवन के अंतिम क्षण तक,
भाई ही साथ होता है।…(५)

भाई-भाई का प्यारा होता,
छोटा भाई दुलारा होता,
भाई अगर बड़ा हो घर में ,
पिता की छांव देता तब है ।…(६)

साथ बढ़े साथ हैं खेलें ,
भाई से निकट कोई रिश्ता नहीं होता,
सुख- दुःख सब बटाँ जो सकता,
भाई कभी नहीं त्यागा जा सकता ।..(७)

 बुद्ध प्रकाश ;मौदहा, हमीरपुर
 
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करे
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर