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मेरी तन्हाईयां- पुरानी डायरी से

                
                                                         
                            कुछ अधूरी ख्वाहिशें, कुछ मेरी तन्हाईयां।
                                                                 
                            
सफ़र मे साथ चलेंगी यादों की परछाइयाँ।।

जहाँ जाता हूँ लोग मुझे पहचान जाते है।
मुझसे पहले पहुँच जाती हैं मेरी रूसवाईयां।।

आज फिर आँखों में अश्क के दरिया बहेंगें।
उड़कर आ गई है फिर यादों की पुरवाईयां।।

उसने हमारा दिल तोड़ा तो क्या गम साकी।
मशहूर है उसकी शहर मे बेवफ़ाईयां।।

तुम तो अभी से ही मर मिटे हो यार ।
अभी तो ली है उस कातिल ने अंगड़ाईयां।।

गुमनाम हर दिल को न कहो तुम यू नाज़ुक।
कितनी चोट खाई जाने कितनी देखी जुदाईयां।।
          - बृज मोहन सिंह बिष्ट
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50 मिनट पहले

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