हम भी लिखते हैं कविताएँ, काश समझ में आता उसको।
दिल का सारा हाल हमारा, काश समझ में आता उसको।।
जिसका नाम लिए बिन कोई शेर मुकम्मल न होता।
कौन मेरी गजलों में रहता काश समझ में आता उसको।।
अपने हिस्से की खुशियों को मैने उसके नाम किया।
क्या क्या मैने खोकर पाया काश समझ में आता उसको।।
शब्दों में जो दर्द छिपाए, कागज पर अश्क बिखेरे है।
हर बातों की ख़ामोशी का अर्थ समझ में आता उसको।।
उसकी यादों के मौसम ने कितने फूल खिलाए हमने।
मेरे इन खाली फुलवारी को काश समझ में आता उसको।।
हमने अपनी चाहत को दुनिया में न विख्यात किया।
बस मेरी नज़रों की भाषा काश समझ में आता उसको।।
रात रात भर चाँद से बातें करके रात बिताई है।
मेरी इन प्रसंग बाते काश समझ में आता उसको।।
मैने हर इल्ज़ाम को हंसकर अपने सिर पर मोल लिया।
कितने दर्द बिठाया दिल में काश समझ में आता उसको।।
उसने ख़ामोशी को मेरे अक्सर मजबूरी समझा है।
चीखों का एक ये भी लहज़ा काश समझ में आता उसको।।
-बृजेश विश्वकर्मा
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