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सब तरसते हैं एक वफ़ा के लिए

                
                                                         
                            सब तरसते हैं एक वफ़ा के लिए
                                                                 
                            
जी रहे क्यों? फिर जफा के लिए
चाहोगे गर बुरा ना होगा भला
हाथ उठते नहीं दुआ के लिए
वक्त आया गुजर ही जायेगा
कुछ भी रहता नहीं सदा के लिए
ज़हर घोल ना इन फ़िज़ाओं में
यही बेहतर रहेगा आबो हवा के लिए
दर्द देने से परहेज कर के तो देखो
रहेगी कोई ज़रूरत नहीं दवा के लिए
हम जो चाहें सब कुछ न होता "वफ़ा"
रहना पड़ता है उसकी रज़ा के लिए
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57 मिनट पहले

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