कोई देखकर मन ही मन उसको मुस्कुरा रहा है
हर कोई प्यार अपना बेहिसाब उस पर लुटा रहा है
हैरां है सभी देखकर उसको इन आंखों से
की लड्डू ही लड्डू को देखो कैसे खा रहा है
करता है तोतली बातें, वो सबको लुभा रहा है
कोई कहता है उसको नटखट फद्दड कोई बता रहा है
करतब वो कैसे कैसे सबको दिखा रहा है
की लड्डू ही लड्डू को देखो कैसे खा रहा है
करता है नकल सबकी नाम लेता सभी के है
नचता है जब निगाहे, थाम लेता सभी की हैं
बंदर है नाम उसका वो सबको हंसा रहा है
की लड्डू ही लड्डू को देखो कैसे खा रहा है
है वो छोटा सा मगर कम नहीं किसी से है
जाना है तो जायेगा रुकता नहीं किसी से है
वो है बड़ा घुमक्कड़ कैसे सबको घुमा रहा है
की लड्डू ही लड्डू को देखो कैसे खा रहा है
बाबा का प्यारा दुलारा है दादी की आंख का तारा है
शरारती है नटखट है गोलू वो प्यारा प्यारा है
गलतियां करता है खुद ही, खुद ही सबको बता रहा है
की लड्डू ही लड्डू को देखो कैसे खा रहा है
हुक्म वो सबपे, सबसे ज्यादा चला रहा है
फिर बाबा की लाठी से वो देखो कैसे मार खा रहा है
प्यार सबका बेहिसाब वो देखो कैसे पा रहा है
की लड्डू ही लड्डू को देखो कैसे खा रहा है
पीता है हुक्का, वो देखो कैसे गुड़ गुड बुला रहा है
डरता नहीं किसी से वो सबको डरा रहा है
खुद तो है गंजा, बाल खींचता सभी के है
करता है तंग सबको चीखता सभी पे है
अब दादी के चश्मे पर देखो कैसे ललचा रहा है
कि लड्डू ही लड्डू को देखो कैसे खा रहा है
- अंशुल शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X