नाली में पड़ी हैं कोल्ड ड्रिंक की बोतलें,
डिस्पोजल गिलास,
फास्ट फूड और आइसक्रीम के खाली डिब्बे,
अपनी बेबसी पर उदास,
कुछ मायूस, कुछ डिप्रेशन में,
सबकी अपनी-अपनी व्यथा-कथा है।
मुफलिसी में नाले के गंदे पानी से,
जैसे अपना पेट पाल रहे हों,
भारी मन से अपने अतीत को देख रहे हों।
रेड बुल, मैंगो स्लाइस, फ्रूटी की मिनी बोतलें,
बच्चों के अधरों से लगी कोला की बोतलें,
मदिरा संग साहबजादों की महफिल में मिली थीं।
आइसक्रीम के कप गवाह बने थे,
मॉडर्न मेमों की किट्टी पार्टी के,
कहाँ कोमल युवतियों के लरजते अधर,
कहाँ रौबदार रईसों का स्पर्श,
और यहाँ नाले का गंदा पानी,
किस्मत न कोसें तो क्या करें?
तभी नाले से सटी स्लम के दो मिलेनियर,
रघु और चुनिया की नजर पड़ी,
कुबेर के इस खजाने पर,
अपने-अपने बोरों के साथ नाले में उतर गए।
वे खुश थे,
खुशी का ठिकाना न था,
सातवें आसमान पर थे,
जैसे भूखे शेरों को मिल गया हो,
असहाय हिरनों का झुंड।
फिर शुरू हुआ एक-एक कर शिकार,
बोतलें, डिस्पोजल हो गए होशियार,
नाले के पानी संग बहने को तैयार।
-ब्रह्मानंद गुप्ता ब्रह्मपाद
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